ह गए हैं 50 परिवार पलायन कर चुके हैं। यहां धान के खेतों में उगी गडेरी, बेल वाली सब्जियों सहित बरसात की सारी फसल जंगली जानवरों ने बर्बाद कर दी है।
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देर से ही सही जागरुक हो रहा है पहाड़ चैत्राष्टमी मेला देघाट मे पहली बार नही की गई बकरे की बलि अल्मोड़ा- देघाट में सैकडो वर्षो से आयोजित होता आ रहा चैत्राष्टमी मेले मे प्रतिवर्ष सप्तमी की रात्री मे बकरो की बलि से कालरात्रि की पूजा होती थी तथा अष्टमी के दिन मे भैंसो की बलि की प्रथा रही लेकिन कुछ वर्षों से भैसों की बलि तो नही हो रही थी लेकिन बकरे की बलि पूर्णतया बन्द नही हो पा रही थी इस वर्ष प्रशासन की मुस्तैदी से पहली बार बकरो की बलि नही हो सकी जबकी एक दर्जन बकरे बलि हेतु लोगों द्वारा लाए गए थे लेकिन प्रशासन द्वारा लोगो को समझा बुझा कर बलि नही देने हेतु तैयार करने मे बडी जद्दोजहद करनी पर मन्दिर परिसर मे इस को लेकर काफी देर तक जद्दोजहद की स्थित बनी रही उपजिलाधिकारी गौरव चटवाल व थाना प्रभारी धर्मबीर सोलंकी बडी मात्रा मे पुलिस बल के साथ पूरी रात मन्दिर परिसर मे डटे रहे जिसमे मन्दिर समिति ने पूरा योगदान दिया
Search for: Facebook Twitter Google + Linkdin Home / Blog / पौनेे चार घंटे में मौत में बदल गई 13 की जिंदगी, अल्मोड़ा में भयंकर बस हादसा अल्मोड़ा March 13, 2018 पौनेे चार घंटे में मौत में बदल गई 13 की जिंदगी, अल्मोड़ा में भयंकर बस हादसा अल्मोड़ा। ताजगी भरी सुबह में यात्रा कर रहे 13 यात्रियों की जिंदगी महज पौने चार घंटे के अंतराल में मौत के मुंह में समां गई। केमू बस का सफर उनकी जिंदगी का आखिर सफर साबित हुआ। बस के खाई में गिरने से 13 लोगों की मौत से कर किसी को झकझोर कर रख दिया। कारणों का स्पष्ट पता नहीं लग पाया है। देघाट (अल्मोड़ा) से रामनगर (नैनीताल) जा रही केमू की बस टोटाम में गोलूधार के पास लगभग ढाई सौ मीटर नीचे खाई में जा गिरी दुर्घटना में करीब 13 यात्रियों के मारे जाने की सूचना है। तहसीलदार प्रताप राम टम्टा के अनुसार बस सुबह पांच बजे रामनगर (नैनीताल) के लिए रवाना हुई थी। दुर्घटना सुबह तकरीबन पौने नौ बजे हुई। बस में 25 लोग सवार थे। घायलों को रामनगर स्थित चिकित्सालय ले जाया जा रहा है। घटना स्थल तहसील मुख्याल...
किसी भूतिया इलाके से कम नहीं दिखता यह गांव अल्मोड़ा। उत्तराखंड के पर्वतीय भू-भागों से निरंतर हो रहा पलायन राजनैतिक दलों व बारी-बारी से सत्ता में काबिज होने वाले भाजपा-कांग्रेस जैसी राष्ट्रीय दलों की उदासीनता के चलते महज एक राजनैतिक मुद्दा बनकर रह गया है। जिसकी बानगी ताड़ीखेत ब्लाक के खूंटधामस क्षेत्र के निकटवर्ती रूमा गांव में देखने में आई है, जहां पूरा का पूरा गांव ही खाली हो चुका है। यह भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट व विधायक व उप नेताप्रतिपक्ष करन महरा के विधानसभा क्षेत्र में पड़ता है। ज्ञात रहे कि पलायन रोकने को प्रदेश में पलायन आयोग का भी गठन कर दिया गया है, लेकीन इसके कोई सार्थक परिणाम आज की तारीख में दिखाई नहीं दे रहे हैं। उल्लेखनीय है कि रूमा गांव सड़क मार्ग लगभग सात किमी की दूरी पर स्थित है। यहां पहुंचने के लिए तीन किमी की खड़ी चढ़ाई चढऩी पड़ती है। 40 साल पहले यहां करीब 80 परिवार रहते थे, लेकिन बिजली, पानी, स्वास्थय, शिक्षा व सड़क जेसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में यहां के वाशिंदे गांव से एक-एक करके पलायन करते रहे और देखते ही देखते पूरा का पूरा गांव खाली हो गया। अंतिम पर...
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